Sunday, 1 December 2013

गौसे आज़म का अमल








गौसे आज़म का नाम सभी ने सुना होगा,इन्हे वलियों का सरदार कहा जाता है.मतलब  सभी वलियों में सबसे आला मुकाम आपको हासिल है ।इनका अमल मुस्लिम तंत्र से किया जाता है,लेकिन  वो अमल  बहुत कि मुश्किलात से भरा होता है,जो कि आम इंसान के बस से बाहर हो जाता है.क्युकी इस्लामिक तरीके से किये जा रहे अमल में आपको नमाज़ और कई शरई बातो का पाबंद होना पड़ता है.इसलिए कई मुश्किलात सामने पेश आती ही है.लेकिन फकीरो ने इस मुआमले में,साबर मंत्रो को भी इजात किया है,जो कि अपने आप में पूरी शिफा और तासीर से भरे हुए है.आज हम उसी मौज़ू पर गुफ्तगु कर रहे है.

काफी दिनों से आप लोगो कि  ख्वाहिश रही है कि हज़रत गौसे आज़म का अमल दिया जाये।जो कि आज दिया जा रहा है.और आगे भी कई ऐसे अमल पेश किये  जायेंगे।लेकिन अमल देने के पहले एक बात आपसे साफ करना  चाहूंगा।अगर आप सोचते है कि,गौसे आज़म का अमल करके आप जिन्नो पर हुकूमत करने लगेंगे,उनसे माल और सामान मंगवा लेंगे।तो जनाब आप गलत सोच रखते है. क्युकी कोई भी वली आपके नेक कामो में ही आपका साथ देंगे,ऐसे किसी काम में वो आपका साथ नहीं देंगे उनके दिल को नागवार गुज़रे।फिर भी वो आपके हर नेक काम में आपका साथ देंगे,जब तक आप नेकी पर है तब तक वो आपके साथ है.आईये अब आपको अमल का तरीका बताते है.

किसी भी नौचंदी जुमेरात से आपको ये अमल शुरू करना होगा।वक़्त होगा रात १२ बजे का.ज़मीन पर सफ़ेद सूती कपडा बिछाये और उस पर बैठे।आपको सफ़ेद लुंगी पहनना है और ऊपर भी एक सफ़ेद कपडा ही डालना है.जो कि बिना सिला हो.जिसे अहराम कहा जाता है.अमल आपको ऐसे कमरे में करना है जहा कोई न आये ४० दिनों तक.अब मगरिब कि और मुह करके बैठ जाये।अपने सामने एक तिल के तैल का चिराग रोशन करे.औए वही पर किसी बर्तन में २१ बादाम और खजूर रखे.लोबान कि अगरबत्ती जलाये।अपने कपड़ो पर इत्र लगाये।अब इस आयत को ९  बार पड़कर किसी तेज़ धारदार चाकू पर दम करे और अपने आस पास एक हिसार खीच ले.

कुल हुवल्लाहु अहद, अल्लाहूस्मद, लम यलिद  व लम युलद व लम युकुल्लुहु कुफ़ुवन अहद 

इसके बाद तस्बीह से इस दुरुद कि एक तस्बीह फेरे 

दुरुद: सलल्लाहो अलेका या मुहम्मदूम  नुरूम मीन नुरिल्लाही 

इसके बाद इस अमल कि  ७ तस्बीह फेरे 

अमल : या गौसे आज़म आओ आओ फरियाद करू मोहम्मद कि आन                   धरु आओ हाज़िर हो दीदार दो,हसन हुसैन के नाम पर,आओ                     आओ आओ अलमदद मेरे मौला 

जब इस अमल कि ७ तस्बीह हो जाये तो ऊपर लिखी दुरुद कि एक तस्बीह फिर फेरे और दिल लगाकर दुआ करे.इसमें तस्बीह वही लेना जिसका  इस्तमाल मुस्लिम लोग करते है.खजूर और बादाम रोज़ सुबह बच्चो में बाट दे गौसे आज़म के नाम पर.

यदि कोई आवाज़ आये तो डरे नहीं अपना अमल जारी रखे.साथ ही अमल के बिच कोई हाज़िर हो जाये और बात करे तो भी जवाब न दे.इससे अमल ख़राब हो जायेगा।आखिर दिन हज़रत ग़ौस पाक के दीदार आमिल को होते है.उनसे अदब के साथ सलाम करे और अपनी बात कहे.आप उनसे वादा ले लीजिये कि जब भी आप ये अमल पड़ेंगे वे आकर आपकी मदद करेंगे।आखिर दिन जब वो हाज़िर हो तो इतर और जो खजूर और बादाम रखे है उनके आगे पेश करे.अमल के दोरान जूठ बोलने से बचे,किसी भी गलत काम को करने से बचे.आपको कामयाबी जरुर मिलेगी।हज़रत से हमेशा अदब से पेश आये,क्युकी वे वली है,किसी के गुलाम नहीं है.

अन्य जानकारी के लिए मेल करे 

pitambara366@gmail.com

जय माँ